दीपक पांडे/खरगोन। मिठाई किसे पसंद नहीं. वैराइटी की अलग-अलग मिठाइयों पर किसी का भी मन ललचा सकते हैं। किसी को काजू कतली पसंद होती है तो किसी को रसमलाई, लेकिन खरगोन की एक मिठाई ने इन दिनों तहलका मचा रखा है. अस मिठाई के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
जिले से 59 किमी दूर पर्यटन नगरी महेश्वर में किला मार्ग पर स्टेट बैंक के पास संचालित श्री कृष्णा स्वीट्स की दुकान को प्यारे भाई की मिठाई के नाम से जाना जाता है और प्रसिद्ध मावा स्नोकी है। अपने अनूठे स्वाद के कारण पिछले 50 वर्षों से यह बर्फीले लोगों की जापान पर राज कर रही है।
कलाकार तक
किसी को भी यह बर्फीली खानी हो तो प्यारे भाई की दुकान पर आना ही होता है। यहां की मावा बर्फी के शौकीन सिर्फ महेश्वर तक ही सीमित नहीं हैं, आस-पास के अलावा के व्यंजन भी हैं। जब भी कोई यहां से विदेश जाता है तो वहां रहने वाले लोग यहां की स्पेशल मिठाई मंगला लेते हैं।
50 वर्ष से अधिक
महेश्वर में उनकी यह दुकान 50 साल से भी ज्यादा समय पुरानी है। सबसे पहले उनके पिता लॉरेंसलाल ने इसे शुरू किया था और उन्होंने ही क्षेत्र में सबसे पहले मावा स्नोकी की शुरुआत की थी। उनका कहना है कि मिठाई का स्वाद ही इसकी खासियत है। टेस्ट का इतना लाजवाब जवाब है कि जो एक बार खाता है वह फिर कहीं और नहीं जाता है।
एक दिन में बिकती है इतनी प्यारी
बता दें कि मावे से बनी मिठाई का स्वाद बरकरार रखने के लिए इसमें कुछ खास चीजें मिलाई जाती हैं. हर दिन 5 से 7 किलो मावा बर्फी बनाई जाती है। दुकान पर ही 3 से 4 घंटे में पूरी तरह से खत्म हो गया है, इसलिए लोग पहले से नंबर लगाकर बैठ जाते हैं। कीमत की बात करें तो मावा स्नोकी महज 400 रुपये किलो है।
25 प्राचीन से खा रहे मिठाई
ग्राहक विक्रम पटेल के अवशेष हैं कि वह बचपन से प्यारे भाई की यह मिठाई खा रहे हैं। यहां का स्वाद इतना लाजवाब है कि कहीं और खाने वालों का मन ही नहीं करता। उनके एलाबोलिस्टिक्स में रहते हैं. जब भी यहां से कोई विदेश जाता है तो प्यारे भाई की मावा स्नोकी जरूर ले जाता है. वहीं ग्राहक अभय तिवारी 25 साल से यहां की मिठाई खा रहे हैं। उनका कहना है कि आज भी टेस्ट एक जैसा है।
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पहले प्रकाशित : 24 नवंबर, 2023, 16:08 IST
