आखिरी बड़कुल/दमोह: मध्य प्रदेश के दमोह जिले में पिछले साल की चुनौती इस साल के प्रतिभागियों में तेजी से वृद्धि हो रही है 22 नवंबर से 23 तक 216 मरीज सामने आ चुके हैं। वहीं पिछले साल की खासियत इस साल 3 स्पीडी के साथ आपके पैर पसार रहे हैं। औस्टन 2 से 3 मरीज रोजाना मिल रहे हैं। जबकी पिछले साल 2022 के आंकड़े पर एक नज़र तो मलेरियल विभाग की रिपोर्ट के करीब 71 मरीज़ों का आंकड़ा पार हो गया था। जबकी इस साल के आंकड़े 3 गुना गति से बढ़ रहे थे है. इससे साफ जाहिर होता है कि जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी के प्रति कितनी जिम्मेदार है।
डॉ. विशाल शुक्ला ने कहा कि ज्यादातर लोग के घर में सुपरमार्केट बंद हो जाते हैं। केमस्कॉट का जादुई पठता है। खास बात यह है कि यह कार्टून साफ पानी में ही पठता है। यदि कोई एक बार लेबल से पीड़ित हो जाता है तो उसके शरीर में बहुत तेजी से पानी की भी कमी हो जाती है। और ब्लड प्लेटसेल्स की कमी हो जाती है। जब खून को जमने वाली मसूदे से, नाक, मल त्यागने वाले रास्ते से खून आने की दुर्लभता होती है तो लक्षण की संभावना होती है। खून की उल्टी भी हो सकती है।
शहरी क्षेत्र में साफ सफाई की कमी है
पूरे जिले में शहरी क्षेत्र में वर्तमान समय में गिरिजाघर की पट्टियाँ हैं। किश्ती घाट सामने आ रहे हैं.खास तौर पर नाओली में सॉलिड पानी का जमाव होने की वजह से इलेक्ट्रानिक मच्छर अपना लार्वा छोड़ देता है। इसमें मुख्य भूमिका नगर पालिका की होती है।लगातार डिजाइन की जांच और पास की जांच तक करने के पावर होते हैं।बर्बर शहर दिल्ली, मुंबई में इस तरह की घटनाएं होती हैं। यह एक तरीका है लोगों में जागरूकता लाने का लेकिन यह नपा नहीं है तो यह हो सकता है नहीं तो आपके सामने है। वहीं नवंबर माह में 71 मरीज़ों ने उपचार के लिए आवेदन किया है।
.
पहले प्रकाशित : 26 नवंबर, 2023, 10:53 IST
