ओपीपी/सोपानकोरबा. भगवान राम ने अपने 14 वर्ष के वनवास के दौरान दंडकारण्य में बहुत समय बिताया था और छत्तीसगढ़ में भी यह क्षेत्र इस दंडकारण्य जंगल का हिस्सा था। आज भी छत्तीसगढ़ एक हरे-भरे घने जंगलों से घिरा हुआ है, और यहां की जनजातीय सांस्कृतिक परंपरा आज भी बनी हुई है।
कोरबा जिले के वनांचल क्षेत्र में एक स्थान का नाम राम आश्रम है, गांव के लोगों की मान्यता है कि भगवान श्री राम जब वनवास के दौरान कोरबा के जंगलों से गुजरे थे, तब उन्होंने यहां रुक कर पवित्र स्थान के बीच अपनी लीला रची थी। तब से इस जगह का नाम राम आश्रम पड़ा है।
इस पत्थर पर बैठे थे भगवान राम
प्रोफेसर विभाग के मार्गदर्शक हरि सिंह क्षत्रिय ने बताया कि राम रेस्त्रां का दृष्टिकोण बहुत कीमती है। कोरबा के रहस्योद्घाटन में ऐसी मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान राम ने इस स्थान को अपने दरबार में स्थापित किया था, वहां के आदिवासियों और ऋषियों को भी संबंध बनाने का निर्देश दिया गया था। तब से लेकर आज तक डेनमार्क द्वारा प्रत्येक कार्तिक पूर्णिमा के दिन उस पहाड़ी पर विशेष पूजा अनुष्ठान के साथ रामायण गायन किया जाता है। इस स्थान पर प्राकृतिक दर्शन का एक उदाहरण देखने को मिला है कि मध्य पाषाण काल के आदिमानव द्वारा निर्मित कुछ मंदिर भी वहां पाए गए हैं। इस स्थान पर सभा के वास्तुशिल्प पत्थर जमा हो गए हैं और बीच के पत्थर जिन पर भगवान राम ने लोगों को दिशा-निर्देश दिए हैं, वे आज भी मौजूद हैं।
इस स्थान पर अच्छा इकोसिस्टम है
फ़ुटका माउंटेन कोरबा का सबसे बेहतर इकोसिस्टम देखने को मिलता है। जबकि पूर्व में यहां बच्चों द्वारा बॉक्सलाइट का निर्माण किया गया था, वह अब पूरी तरह से बंद हो गया है। लेकिन आज भी यह पर्वत आपके लिए अपनी जैव विविधता के लिए बेहतर है, यहां पहुंचने पर आपको प्रकृति सबसे पहले एक शांत वातावरण का माहौल देती है। यहां की जैव विविधता के साथ आप इस जगह पर हाथी जानवर सांभर, कोटरी, भालू शायर को देख सकते हैं।
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पहले प्रकाशित : 27 नवंबर, 2023, 12:21 IST
