उत्तर
भारत में आधी आबादी से लेकर आबादी तक महिलाएं खून की कमी से मछली पकड़ने का काम कर रही हैं।
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक 6 महीने से 5 साल तक की महिलाएं भी एनीमिक हैं।
गर्भवती महिलाओं में आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया: प्रेसीडेंटेंसी में महिलाओं को अपना रिज्यूमे रखने की जरूरत होती है, वह वज्रैंट वे सिर्फ अपना नहीं बल्कि अपने गर्भ में पल रहे नन्हें किस्टल का भी रिवाइवल रखते रहते हैं। यही वजह है कि गर्भाधान की अवधारणा शुरू हो गई है, महिलाओं को पोस्टिक खाने से लेकर नशे की सलाह दी जाती है। इतनी ही नहीं बाते और माँ की फिजियोलॉजी को देखते हुए कुछ सामान्य दवा भी दी जाती है।
आमतौर पर प्रेसीडेंटेंसी में फोलिक एसिड या आयरन और कैल्शियम की दवा डॉक्टर के लिए दी जाती है। हालांकि कई बार प्रेसीडेंट महिलाएं इन दवाइयों को लेने में ऐसी गलतियां कर देती हैं, जिसके कारण न केवल उनके शरीर में खून की कमी हो जाती है, बल्कि उनके पेट में पलने वाले को भी पूरी तरह से फुलाना पड़ता है।
महिलाओं में ख़ून कम बनने की मिसालें होती हैं। प्री-साइंटेंट महिलाओं को उनके और पार्टनर्स दोनों के लिए खून की जरूरत होती है, यही कारण है कि ग्लूकोज आयरन या फोलिक एसिड की खुराक के पहले ट्राइमेमोर से ही जाना जाता है, ताकि शरीर में दिलावेड की पर्या गुफ्तता रहे लेकिन एक दोस्त की वजह से ये गोलियां अपना पूरा असर नहीं दिखाती हैं, यहां तक कि शरीर में खून भी नहीं बनता है। साथ ही दोस्तों में भी खून की कमी हो जाती है।
नेशनल एसोसिएशन फ़ोर रिप्रोडक्टिव एंड एलिज़ाबेथ हेल्थ हेल्मेट चेप फ़्लोटर की अधोगम्यक्ष और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में सिंगिंगोलॉजी एंड ऑब्स्टैमेंटिक कोचिंग विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. मंज़िल पुरी बताते हैं कि किस देश में महिलाएं एक बड़ी आबादी वाले संग्रहालय से संपर्क कर रही हैं। नेशनल फैमिली हेलथ सर्वे-5 के अनुसार 15 से 49 साल की 52.2 प्रतिशत महिलाएं साक्षात्कार से रह रही हैं। वहीं 6 महीने से लेकर 5 साल तक के 67.1 प्रतिशत एनीमिक हैं। देश में छोटी उम्र यानी 15 से 19 साल की 59 फीसदी महिलाएं एनीमिक हैं। ऐसा सिर्फ खूनी ग्रामीण क्षेत्रों में ही नहीं है, बल्कि पढ़ा लिखा शहरी समाज में भी महिलाओं और प्रतिभाओं की कमी है।
पूर्व स्वामित्व वाली महिलाएँ नौकरियाँ करती हैं..
डॉ. महंत पुरी का कहना है कि लेडी होर्डिंग मेडिकल कॉलेज और कलावती सरन बाल स्कैंडल में हर महीने 1000 महिलाएं प्रसव के लिए आती हैं। इनमें से ज्यादातर में खून की कमी पाई गई है। जब महिलाओं से बातचीत की गई तो पता चला कि ज्यादातर महिलाएं आयरन और कैल्शियम की खुराक लेने के दौरान आयरन और कैल्शियम की खुराक में बड़ी खुराक लेती हैं। ये दोनों बोतलें एक साथ खायी जाती हैं। जबकि ऐसा करने से शरीर में आयरन का अपहरण नहीं हो पाता है और आयरन की गोली लग जाती है। इससे शरीर को आयरन नहीं मिलता और स्ट्राडलड नहीं बन पाता। देखिए ये महिलाएं एनीमिक हो जाती हैं.
आयरन-कैल्शियम की गोली कैसे लें..
डॉ. महंत पुरी का कहना है कि हमेशा कैल्शियम और आयरन की खुराक अलग-अलग तरह से खाई जाती है। कैल्शियम की गोली हमेशा खाने के साथ ली जाती है लेकिन आयरन की गोली 2 घंटे बाद लेनी चाहिए। अगर आप दिन में एक बार ये गोलियाँ ले रहे हैं तो कोशिश करें कि ब्रेकफ़ाफा सुपरस्टार या मोटोरोला के साथ और मूड के बाद इन खिलौनों को लें। रात में भी इन नूतन को इसी तरह ले जा सकते हैं।
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पहले प्रकाशित : 28 नवंबर, 2023, 16:57 IST
