नई दिल्ली. द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रपति ने उत्तराखंड में एक रंगीन बंदर को बचाए जाने पर खुशी जाहिर की है और कहा है कि राष्ट्र अपनी जीवंतता को सलामत रखता है और बड़े पैमाने पर व्यक्तिगत खतरे में भी महत्वपूर्ण स्मारक स्मारकों के निर्माण के लिए अपनी पहचान रखता है। मुर्मू ने कहा कि 17 दिन तक की पीड़ा, अवसाद कार्य में बच्चों का सामना, मानवीय सहनशक्ति का प्रमाण है।
मुर्मू ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “मैं (बचाव) टीम और सभी विशेषज्ञों को बधाई देता हूं, मैं चाहता हूं कि इतिहास के सबसे कठिन बचाव अभियानों में से एक को पूरा करने के लिए अविश्वसनीय धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ काम किया जाए।” ” उत्तराखंड के सिलक्यारा सुरंग में 16 दिन तक विभिन्न पुरातत्व के पुनर्निर्माण अभियान के बाद 17 वें दिन सभी 41 राक्षसों को बाहर निकाला गया।
राष्ट्रपति ने कहा, “मुझे यह जानकर राहत और खुशी महसूस हो रही है कि उत्तराखंड में एक सुरम्य समुद्री तट को बचा लिया गया है।” बचाव कार्य में बच्चों का सामना करने के कारण 17 दिन तक उनकी पीड़ा सहनशक्ति का प्रमाण रही है। राष्ट्र अपने जीवटता को सलामत करता है और अपने घर से दूर, बड़े व्यक्तिगत जोखिम पर भी महत्वपूर्ण गोदामों के निर्माण के लिए अपना आवास रखता है।
चारधाम यात्रा मार्ग पर डेढ़ चार किलोमीटर लंबी सिलक्यारा-बड़कोट गंग का 12 नवंबर को एक हिस्सा ढहने से समेकन को शामिल किया गया, ताकि 17वें दिन वॉरस्टार पर अभियान चलाया जा सके, यह सफलता मिली। अविश्वासियों को जारी करने के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और सेंट्रल रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे स्टेट मिनिस्टर जनरल (सेवानिवृत्त) वीके सिंह भी मौजूद रहे।
बाहर निकल रहे मुख्यमंत्री ने अपने गले लगाए और उनसे बातचीत की। डिज़र्वेशन कार्य में पुराने लोगों के साहसिक कार्यों की भी पुष्टि की गई। 30 किमी दूर चिन्यालीसौड में स्थित सिलक्यारा से 30 किमी दूर स्थित एक अस्पताल में बनाए गए अस्पताल में ले जाया गया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनके ‘ईगास और बग्वाल’ (दिवाली के दस दिन बाद पर्वतीय क्षेत्र में मनाई जाने वाली दिवाली) ही उनके अवशेषों की खुशी है।
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पहले प्रकाशित : 28 नवंबर, 2023, 23:51 IST
