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हम सरकार से ये नहीं कह सकते…सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा? सीपीआर को आर्किटेक्चरल सिलेबस में शामिल करने की याचिका


नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने शास्त्रीय संगीत कार्यक्रम में कार्डियोपल्मोनरी रिसास आर्किटेक्चर (सीपीआर) प्रशिक्षण को शामिल करने का निर्देश दिया।

प्रधान न्यायाधीश डी. वै. चन्द्रचूड़, अर्थशास्त्री जे.बी. लेकिन पारडीवाला और रॉबर्टो मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि बच्चों को कई अलग-अलग तरह की चीजें सीखनी चाहिए, लेकिन कोर्ट सरकार उन सभी को कोर्स में शामिल करने का निर्देश नहीं दे सकती।

पृष्णि ने कहा, “राजनीतिक (बच्चों को) पर्यावरण के बारे में सीखना चाहिए।” बच्चों को भाईचारे के बारे में जानें। बच्चों को कार्डियोपल्मोनरी रिसास आर्किटेक्चर के बारे में सीखना चाहिए। हम सरकार से यह नहीं कह सकते कि वह हर उस चीज को शामिल करे जो पसंद है…ये सरकार तय करके जाने वाले मामले हैं।’

रोहिणी निवासी दादी की ओर से पेश किए गए वकील ने कहा कि सीओवीआईडी ​​​​-19 के बाद अचानक दिल का दौरा पड़ने की बीमारी की बचपन की यादों का ज़िक्र करते हुए कहा गया कि यह एक अंतिम अवशेष है। पृष्ण ने कहा, “केवल यही एक अवशेष क्यों है, बहुत सारे अलग-अलग मुद्दे हैं…आपकी वास्तुकला पाठ्यक्रम में उन्हें शामिल नहीं किया गया है।”

प्रियंका ने कहा, ”बच्चों को धूम्रपान नहीं करना चाहिए, यह पूरी तरह से यूनिवर्सल एक्सचेंज का मामला है।” इसलिए, किस शीर्ष अदालत को इसे पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए निर्देश 32 के तहत रीट जारी करना चाहिए। पृष्णि ने कहा कि सरकार को समग्र पाठ्यक्रम तय करना चाहिए। एबी ने कहा, ‘यह पूरी तरह से आध्यात्मिक नीति का मामला है।’

शीर्ष अदालत ने कहा कि आवेदन में निकाली गई संपत्ति नीतिगत क्षेत्र से संबंधित है। कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्र के लिए सलाह के साथ-साथ सलाह भी दी जाती है। पीठ ने कहा, ‘इसके अलावा, शीर्ष अदालत ने ऐसा कोई आदेश जारी करने की इच्छा नहीं रखी है। ‘डिजिटल का भुगतान किया जाता है।’

टैग: सुप्रीम कोर्ट



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