असली काशी. 17 दिन बाद खुली हवा में सांस ली और बताया कि आखिरी सपने 400 घंटे में जो सूरज की रोशनी के बिना डूबे थे। मजदूर अलोकतांत्रिक सिंह ने बताया कि उनका यह हादसा सामने आया था। सभी कार्यकर्ताओं के बाहर की तैयारी में थे कि प्लास्टिमिक आवाज़ें आई थीं और उनकी 300 मीटर दूर मालबा गिरी थी। आवाज बहुत तेज हुई थी और इससे सभी मजदूर बेरोजगार हो गए थे। हालाँकि ऐसे आपातकाल और रेज़्यूमे से स्नातक के लिए कंपनी ने पहले प्रशिक्षण दिया था और बताया था कि ऐसे वक्षोभ शुरू होने वाले हैं?
अलोकतांत्रिक सिंह ने बताया कि दुर्घटना के बाद हमें पाइप के माध्यम से उनकी सूचना मिली थी। ऐसे में हमने बाहर के लोगों को बताया कि हम लोग फंसे हुए हैं. यहां मलबा गिर गया है. वहीं इस सूचना के बाद विदेशियों ने मदद की सलाह की कोशिश शुरू की। सबसे पहले आउट गिरा मलबा मोशन पिक्चर पाइप खोजा गया। पाइप के मिलने के करीब 18 घंटे बाद ऑस्ट्रेलियन्स की नियुक्ति हुई। आरंभिक 18 घंटे तक हमारा संपर्क नहीं था और ऐसे में हमें यह विश्वास नहीं था कि हमारे बारे में बाहरी लोगों को सूचित किया गया है और हमारी वे खोज कर रहे हैं।
पाइप से मिला जीवन दान, इसी से भेजा गया था सबसे पहले चना और मेवा
नीतीश सिंह ने बताया कि यह चार इंच का पाइप था और यही हमारे जीवन का सहारा बना। इससे सबसे पहले चना और फिर डॉगी डॉक्युमेंट्स को मिले। सुरंग के अंदर जो भी खाना देखने को मिला था उसे लेकर हम सभी एकजुट होकर बात कर रहे थे।

पहले चार इंच, फिर छह इंच का पाइप से खाना बनाना
कभी मुरमुरे आये तो कभी ग्रेडिएंट. सुरंग के भीतर की चमकती रोशनी थी, इससे हम एक-दूसरे को देख सकते थे। पहले चार इंच वाला पाइप था तो उसकी अपनी सीमा थी। हमें रोटी-चावल नहीं मिल रहा था, लेकिन जब छह इंच वाला पाइप साफ हो गया तो फिर मोमराम का आना शुरू हो गया। प्रचुर मात्रा में फल, संतरा, सेब, पोषक तत्व और दूध सब मिला, कोई कमी नहीं रही। भी मिलें.
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पहले प्रकाशित : 29 नवंबर, 2023, 23:55 IST
