आकाश कुमार/जमशेदपुर. झारखंड के लोहा नगरी में भी ठंड ने ठंडक दे दी है और इसी तरह लोगों के घरों से गर्म कपड़े और गर्म खाने की तलाश शुरू हो गई है। जहां एक तरफ सारे लोग गर्म खाना खा रहे हैं और गर्म कपड़े पहने हुए हैं.वहीं, एक ऐसा वर्ग भी है जिसमें हर रात ठंड में भी अनमोल कुल्फी की तलाश रहती है.
कम्युनिस्ट के साकची आम बाग के ठीक घाट में कई सागरों से कुल्फी के स्टॉल निकले हुए हैं। स्टॉल के संचालकों का कहना है कि ठंड के मौसम में कुल्फी खाने के लोग ज्यादातर शौक रखते हैं और यहां रात करीब 10:00 बजे तक लोगों की भीड़ रहती है।
केसर से लेकर पिस्ता कुल्फी तक
लोक 18 को आदिवासियों ने बताया कि उनके पास पांच प्रकार की कुल्फी है जिसमें काजू 20 रुपये, रबड़ी 30 रुपये, केसर बादाम 40 रुपये, खोवा 50 रुपये और कुल्फी 30 रुपये शामिल है।जो की सुबह 11:00 बजे से लेकर रात के रात 10:00 बजे तक दुकान खुली रहती है। कुल्फी में खट्टा दूध, चीनी, खोवा, काजू, बादाम और केसर का मिश्रण बनाया जाता है। फिर उसे बर्फ में जमा कर लोगों को नुकसान पहुँचाया जाता है। इनके पास की गर्मी के मौसम में 80 लीटर राबड़ी की आबादी होती है और ठंड में लोग 50 लीटर तक चट कर जाते हैं। कुल्फी खाने वाली रीना जी ने बताया था कि वे जब भी बाजार में आती हैं तो कुल्फी यहां की रहती हैं और उनके बेटे ने कहा था कि वह कॉलेज में रहती हैं। मिस नहीं करते हैं। वैसे इनके पास कई सारे ग्लूकोर्स और फ्लेवर फुल फुल्फी इतनी कम कीमत में बिकती है।
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पहले प्रकाशित : 30 नवंबर, 2023, 17:53 IST
