आखिरी बड़कुल/दमोह. वट वृक्ष को हिन्दू धर्म में पूजनीय माना गया है। इसे आयुर्वेद में संजीवनी बूटी कहा गया है. मात्रा में पाए जाने वाले पुराने बरगद के पेड़ की जड़ें नावों में रहती हैं। इनमें पोषक तत्वों से युक्त पोषक तत्व से लेकर सारे विटामिन पाए जाते हैं। इस जड़ का केकेल गाय के दूध में पूरे पीने से पेशाब वाली जलन से राहत मिलती है।
क्या दोष के लिए
बरगद के पेड़ मंदिरों में दाढ़ी होती हैं। आयुर्वेद में बरगद के पेड़ का उपयोग कई बीमारियों और संक्रमणों के इलाज में किया जाता है। इस पेड़ का बीज बहुत छोटा होता है. लेकिन, यह वृक्ष विशाल होता है। यह पौधा फाइकस के परिवार से संबंधित है। इसके हरे हरे पौधे होते हैं। इन पेड़ों की उम्र 250 साल से ज्यादा भी हो सकती है.
रामबाण के लिए कई दुकानें
आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. दीप्ति नामदेव के, वट वृक्ष की हवा में लटकी जड़ें शीघ्रपतन से अधर में लटकी हुई हैं। इतना ही नहीं, इसका डॉक्टर मधुमेह के इलाज में आता है। जोड़ों के दर्द से लेकर शरीर की सूजन से राहत पाने में इस वट वृक्ष की सूजन का तेल रामबाण माना जाता है। गठिया के दर्द में इस बरगद के पेड़ के दूध से मालिश करने से मिलती है राहत।
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पहले प्रकाशित : 1 जनवरी 2024, 16:04 IST
