सौरभ वर्मा/रायबरेली: भारत में बहुत पहले से ही गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अलग-अलग प्रकार की मसालेदार दवाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। भारत को आयुर्वेद का जानकार भी कहा जाता है। जिसका लोहा पूरी दुनिया का मालिक है। हम भारतवासी बड़ी से बड़ी बीमारी के इलाज में आयुर्वेदिक औषधियों का ही उपयोग कर रहे हैं। धरती पर हमारे आसपास ऐसे हजारों पद-पौधे मौजूद हैं, जिनके औषधीय गुणों के कारण कई औषधियाँ बनाई जाती हैं। आयुर्वेद में ऐसे पेड़-पौधों को सबसे ऊपर दिया गया है।
जड़ी-बूटी की बात होती है तो अक्सर तुलसी, गिलोय औषधि या जड़ी-बूटी की सबसे ज्यादा बात होती है। लेकिन ऐसे कई उपचार हैं जिनका उपयोग कई स्थिर उपचार औषधियों में किया जाता है। लेकिन जानकारी के अभाव में उन्हें अनमोल समझ कर हम उन्हें नष्ट कर देते हैं।
इस रंग के होते हैं फल
दरअसल, हम बात कर रहे हैं जंगल में पाए जाने वाले एक साधारण से उपाय मकोय की। आयुर्वेद में कई गंभीर दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। आयुर्वेद में इसे काकामाची के नाम से भी जाना जाता है। आमतौर पर यह छायादार स्थान सबसे अधिक पाया जाता है। जामुनी और लाल रंग के टमाटरों पर इसके प्रयोग छोटे-छोटे फल जैसे होते हैं। इस उपकरण की लंबाई आम तौर पर 1 से 1.5 फीट तक होती है। साधारण सा दिखने वाला यह वेयरहाउस हमें कई स्टोरों में से एक में काफी सहायक है।
मकोय भी कहीं-कहीं उगता है
मकोय को असल में एक इंद्रधनुष माना जाता है, जो कहीं भी उगता है। जंगल में तो ये नजर आती ही है, ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ ऑफिस के मेड में भी इसकी खूबसूरती नजर आती है. शहरी क्षेत्र के पार्कों में जो ट्रैक बने हुए हैं, उनकी दोनों तरफ बनी झील में भी मकोय बहुत दिखता है। इसका आकार मैट के दानों से कुछ छोटा होता है। फल कच्छा पर छोटा मोटा हरा जैसा दिखता है और जब पकता है तो रंग लाल, पीला या भूरा काला जैसा दिखता है वैसा ही दिखता है
युवा रखरखाव रखरखाव में मदद करता है
आयुर्वेद में इसे त्रिदोषनाशक माना जाता है। यानी पित्त और कफ का नाश करने वाली ये दवा है. आयुर्वेद के अनुसार हमारे शरीर में वात-पित्त और कफ तीन दोष होते हैं। जब इन तीनों में से किसी एक दोष की कमी या अधिकता हो जाती है। तो हम बीमार पड़ जाते हैं, इसका सेवन करने से हमें बेहद आराम मिलता है। इस औषधि के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। यह औषधि पौरुष बल को तो पुनः प्राप्त करती ही है, साथ ही इसके पादपों से निर्मित काढ़ा शरीर का विष नष्ट कर देती है तथा बुढापे की गति को भी मंद कर देती है।
रामबाण के लिए है ये शर्त
मकोय का प्रमुख रूप से एक औषधि पौधा है। कुष्ठ और बुखार के इलाज में इसका सेवन, सांस संबंधी विकारों को दूर करने में, किडनी की बीमारी, सूजन, खुजली, पेलिया, दस्त या कई प्रकार के कैम रोगों के इलाज में इसका सेवन हमारे लिए बेहद फायदेमंद है।
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पहले प्रकाशित : 1 जनवरी 2024, 20:21 IST
