आखिरी बड़कुल/दमोह: गूलर के पेड़ से तो आप सभी परिचित होंगे। गूलर के पेड़ को हिन्दू धर्म में बड़ा ही पवित्र माना गया है। गूलर के फूल को लेकर भी ग्रामीण क्षेत्र में प्रचलित कहावत है। लेकिन, क्या आप जानते हैं गूलर का फल भी बहुत बड़ा चमत्कारी होता है। यह फल औषधि की खान है. यह कई अचूक इलाज करने में सक्षम है।
बौद्ध क्षेत्र में गूलर को उमर के नाम से जाना जाता है। यह पेड़ औषधीय गुणों से भरपूर है। आयुर्वेद में उमर के पेड़ का ही औषधीय गुण बताया गया है। इसमें एंटी-पाइरेटिक, एंटी-इन्फ्लेमेटरी, एंटीमाइक्रोबियल, एंटीडायबिटिक आदि गुण होते हैं। इसके अलावा बवासीर, डायरिया और फेफड़ों की बीमारी के लिए यह रामबाण औषधि है।
पेड़ से अगुआई वाला दूध बहरे में
गूलर का वानस्पतिक नाम ‘फ़िक्स रेसमोसा’ है। इस पेड़ की किताब से आश्रम वाले सफेद दूध को ‘हेमदुग्धक’ कहा जाता है। इस दूध की 15 से 20 सब्जियों को साफ पानी में पूरे पेय से रक्तार्श खूनी दरार और रक्त के टुकड़े में लाभ मिलता है। इसका दूध का लेप मसे पर लगाना आरामदायक है।
पेट के विकार हो जायेंगे दूर
अक्सर लोग ज्यादा खाना खा लेते हैं, जिसकी वजह से अपच की शिकायत हो जाती है। खट्टी डकार या फिर पेट दर्द, गैस, बदहजमी जैसी समस्या हो जाती है। इस समस्या से निपटने के लिए गूलर के फल का उपयोग करने से अल्सर या पेट में राहत मिलती है। गुलर के फलों में सैकड़ों छोटे-छोटे दुकानदार होने की वजह से इसे जंतुफल भी बोला जाता है।
कई उपकरणों को कर दूर
आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. दीप्ति नामदेव ने बताया कि हिन्दू धर्म में गूलर के पेड़ को पूजनीय माना जाता है। विवाह-विवाह में मंडप के नीचे इस वृक्ष की लकड़ी का प्रयोग किया जाता है। वैसे ही औषधीय रूप में क्वाथ या किसी भी तरह के घाव में बुकमार्क न फॉर्मल का भी उपयोग किया जाता है। बुखार को दूर करने से लेकर छाती के रोगों के उपचार और फेफड़ों संबंधी बीमारी के इलाज में गूलर औषधि औषधि है।
अस्वीकरण: इस खबर में दी गई औषधि/औषधि की सलाह हमारे वैज्ञानिकों द्वारा दी गई चर्चा के आधार पर है। यह सामान्य जानकारी है, कोई व्यक्तिगत सलाह नहीं। हर व्यक्ति की आवश्यकताएं अलग-अलग हैं, इसलिए डॉक्टरों से सलाह के बाद ही, किसी भी चीज का उपयोग करें। कृपया ध्यान दें, लोकल-18 की टीम का किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए कोई उत्तरदायित्व नहीं होगा।
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पहले प्रकाशित : 2 जनवरी 2024, 16:47 IST
