अनूप/कोरबाः कोरबा के कुसमुंडा क्षेत्र में सिगड़ी मेडल गोल्ड एक परिवार के लिए महंगा पड़ गया। ठंड से बच परिवार के कमरे में ही सिगड़ी रख दी थी। रात में उनके दम घुटने लगे और खराब हो गए। सोए एसोसिएट्स ने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर उन्हें विकासनगर में भर्ती में शामिल कर लिया। जहां प्रारंभिक उपचार के बाद उनकी समस्याओं को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां उनका उपचार जारी है।
कुसमुंडा स्टेशन के अंतर्गत न्यू रेलवे कॉलोनी में परमाणु तांडी निवास करता है। रेस्टुरेंट रात ठंड से प्लास्टिक तांडी ने सिगड़ी जलवायी थी। कुछ देर बाद आग तापने के बाद सिगरेट को कमरे में ही सभी सोने चले गए। देर रात अचानक कमरे में लोगों की आँखों में जलन, सिर दर्द और उल्टी होने लगी। चक्कर आने की समस्या को देखते हुए उन्हें अलग-अलग सीएल के विकासनगर कुसमुंडा डिस्पेंसरी में लाया गया। जहां उनकी गंभीर स्थिति बनी हुई थी। उन्हें मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बदल दिया गया। अस्पताल में भर्ती लोगों में साइबोसोनवारी, हिमांगी नायक, नमिता नायक, नंदिनी नायक, दो पुरुष समेत 11 लोग शामिल हैं। सभी का उपचार जिला अस्पताल में चल रहा है। उनके खतरे से बाहर बताया जा रहा है।
कोरबा में यह कोई पहली घटना नहीं है, इससे पहले भी क्षेत्र में इस तरह की घटना सामने आई है। जिसमें एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो चुकी है. जहर, ब्लोअर या अंगीठी जलाते समय कमरे को पूरी तरह से बंद नहीं करना चाहिए। हीट से धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे चलने वाले कमरे का ऑक्सीजन खत्म हो जाता है और कार्बन मोनोऑक्साइड ज्यादातर होने लगता है। यह ऑक्सीजन गैस सांस के माध्यम से फेफड़ों तक पहुंच कर खून में मिल जाती है। इस कारण से खून में हीमोग्लोबिन का स्तर कम हो जाता है और एब्डोमिनोसिस बन जाता है और इंसान की मृत्यु हो जाती है।
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पहले प्रकाशित : 2 जनवरी 2024, 14:34 IST
