आशीष आशिक़/आशीर्वाद. जैसे खोखला अन्न, आकृति होगी मन, यह एक आयुर्वेद का श्लोक है। ऋषि मुनि इस श्लोक के माध्यम से आप पूर्ण रूप से स्वस्थ थे और एक स्वस्थ जीवन जी रहे थे। शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक रूप से भी वह बहुत मजबूत होते थे। अगर आज के समय में भी हर व्यक्ति इसी तरह के भोजन का सेवन करता है, तो वह लंबी उम्र के साथ-साथ स्वस्थ और स्वस्थ रहेगा और उसका दिल मजबूत रहेगा। मानसिक रूप से भी मजबूत के साथ-साथ विभिन्न प्रकार की चुनौतियों से आप दूर रहें।
आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉक्टर जगपाल सिंह ने बताया कि पूर्व में हमारे ऋषि मुनि पांच प्रकार के अनाज का प्रयोग करते थे। यह अनाज जौ, चना, मटर, मक्का, बाजरा इन सभी का उपयोग व्यक्तिगत पूर्ण रूप से स्वस्थ रहता है, क्योंकि इन अनाजों में अनाज, अनाज और शरीर के लिए सभी आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा मात्रा में होती है। पूर्व में भी लोग बिजनेस का इस्तेमाल कर लंबी उम्र तक अपने साथ रहते थे और उनका दिल मजबूत रहता था।
पांच अनाज के स्वास्थ्य बेनिट्ज़
इन अनाजों का उपयोग करने से पूर्ण रूप से नियंत्रित होता है। मस्तिष्क मजबूत होता है. हृदय रोग विशेषज्ञ की समस्या नहीं होती। शरीर बलशाली होता है. स्वस्थ्य अन्य सभी चिकित्सीय चिकित्सकों से यह अनाज हर व्यक्ति को दूर रखता है। यहां की चालन में आ रही शर्त से भी आप सुरक्षित रह सकते हैं। इन अनाजों के प्रयोग से प्रतिरक्षा बहुत ही मजबूत हो जाती है।
पाँच प्रकार के अनाज का उपयोग कैसे करें
चना, मटर, ज्वार, मक्का, बाजार इन सभी को समान मात्रा में लेकर बाइक से इसकी पिसाई कर लें और इसी की रोटी बनाकर इसका उपयोग करना शुरू कर दिया। इनमें पाँच अनाजों में टुकड़ों की मात्रा और अन्य आवश्यक पोषक तत्त्व प्रचुर मात्रा में होते हैं। जिससे प्रत्येक व्यक्ति लंबी आयु तक स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सके और आप को निरोग निवास मिल सके।
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पहले प्रकाशित : 3 जनवरी 2024, 16:35 IST
