Homeछत्तीसगढ़पिता-खेती-गांव-लड़का-अजूबा-शहर-टॉप-सबसे-बड़े-विश्वविद्यालय-राज्य-मिलेगा-स्वर्ण-पदक – News18 हिंदी

पिता-खेती-गांव-लड़का-अजूबा-शहर-टॉप-सबसे-बड़े-विश्वविद्यालय-राज्य-मिलेगा-स्वर्ण-पदक – News18 हिंदी


रामकुमार नायक/रामकुमार नायक. सफलता कड़ी मेहनत और लगन का परिणाम है। इसका जीता जागता उदाहरण महेत्तर लाल यादव हैं, जो छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े विश्वविद्यालय हैं यानी पंडित सासुविय शुक्ला विश्वविद्यालय रायपुर के भूगोल विभाग से पूरे विश्वविद्यालय में शीर्ष पर हैं। ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले महेत्तर ने प्रतियोगिता वाले शहर में अपने नाम का लोहा मनवाया है। महेत्तर छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले के लवन शहर के दक्षिण दिशा में स्थित छोटे से गांव हरदी के रहने वाले हैं। प्राथमिक शिक्षा हरदी के सरकारी स्कूल और ग्रेजुएशन लवन के सरकारी कॉलेज से हुई है।

बता दें कि ग्रेजुएशन की पढ़ाई के बाद पियाजा की पढ़ाई करने वाले महेत्तर ने राजधानी की तरफ कूज और प्रदेश की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी यानी पंडित मैथ्यू शुक्ला यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया था। महेत्तर ने आगे बताया कि कुल 2000 संख्या की परीक्षा होती है, जिसमें 1557 संख्या मील हैं। इसी तरह असंतुष्ट महेत्तर ने जियोग्राफी विभाग से पूरी यूनिवर्सिटी में टॉप किया है। देखते ही देखते 20 फरवरी को विश्वविद्यालय के दीक्षान्त समारोह में स्वर्ण पदक से सम्मानित किया जायेगा। बलौदा बाजार जिले के हरदी गांव के क्रांतिकारी परिवार में जन्में महेत्तर यादव के पिता मेमोरियल यादव खेती किसानी करते हैं। परिवार में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई करने वाले अकेले महेत्तर हैं।

माता-पिता और शिक्षक को दिया श्रेय
महेत्तर ने बताया कि शुरुआती दिनों में जब गांव से शहर में पढ़ाई करने आए तब समस्याओं का सामना करना पड़ा क्योंकि पूरे देश सहित राजधानी रायपुर में भी कोविड का दौर चल रहा था, लेकिन काफी हद तक सहमति भी नहीं मिली। अनुमान 2500 रुपये प्रति माह डेक महेत्तर बिजनेस लेकर अकेले रहना लगे थे। सफलता का श्रेय कोई भी इंसान सफल होता है, तो उसके पीछे जरूर कोई न कोई होता है। महेत्तर की सफलता के पीछे माता-पिता के अलावा विश्वविद्यालय के भूगोल अध्ययन शाला के संयोजन का है। महेत्तर ने बताया कि भूगोल अध्ययन शाला में बच्चों को पढ़ाने के लिए एक अलग ही जुनून होता है।

सामान्यतः देखा जाता है कि बच्चों में केवल पुस्तक ज्ञान का महत्व होता है। लेकिन पंडित सानिध्य शुक्ल विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग में पुस्तक ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। जैसे बच्चे अपने लिए मेहनत करते हैं, लेकिन यहां पर शिक्षक वाले बच्चे भी अपने बच्चों के लिए मेहनत करते हैं। निश्चित ही यहां के विभागाध्यक्ष प्रो उमा टूल्स के अलावा अन्य प्रोफेसर का योगदान रहा है.

टैग: स्थानीय18, रायपुर समाचार



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