रिपोर्ट-पीयूष पाठक
उत्तर. गुटखा जनित है. विषाणु से फेल रही घातक आडिटोलिक से लोगों को अपनी जिल्द में ले रही हैं। राजस्थान का राजस्थान शहर गुटखों की पूंजी बनती जा रही है. यहां गुटखे के सेवन के कारण नाश्ते की संख्या भी रोंगटे कर देने वाली है।
उत्तर प्रदेश में गुटखे का धुआंधार बिजनेस चल रहा है। रोज नए गुटखे बाजार में आने से इसकी लाैटा भी लोगों को लग गई है। गुटखा की लत बढ़ने से गंभीर स्तर के अनुयायियों की संख्या में भी भारी गिरावट आई है। बीमारी के आंकड़े आ गए हैं. अगर आपको भी इसकी लता है तो इन आंकड़ों पर एक नजर जरूर डालनी चाहिए।
कैंसर के थेले
भविष्यवाणी का शायद ही कोई चौकोर चौकोर बचा हो जहां आपको गुमटी और ठेले लगे न दिखें। इनसे मुख्य सितारा पान और गुटखों के हजारों टुकड़े लटके देख सकते हैं। ये साँचे में सीधे सीधे नागार्जुन गिरोह रह रहे हैं। कहीं भी गुमटी असली होती है वहां गुटखे का धंधा करने वाले ही मिलते हैं। विश्वंत में हर उम्र के लोग रहते हैं। आदर्श से युवा पीढ़ी को भी इस जहर की लता तेजी से लग रही है।
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रोंगटे करने वाले आंकड़े
ओएटीओ दा. सुनील चौहान ने बताया कि गुटखा खाने से सबसे ज्यादा मुंह का कैंसर और जीभ का कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां होती हैं। साथ ही सिस्टमिक बीमारी भी होती है. अन्याय में ही नहीं देश में इससे बच्चे लेकर बूढ़े तक पीड़ित हैं। वाराणसी शहर के राजीव गांधी सामान्य अस्पताल में आंकड़ों पर नजर डालें तो यह आंकड़ा हर साल बढ़ रहा है।
स्थिति खराब है
साल 2021 में अस्पताल में कैंसर के 1067 मरीज आए। साल 2022 में यह संख्या 2883 हो गई। 2023 में पात्र कलाकार वाला रहा। जहां गुटखा खाने से वाली बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या 9129 हो गई. एक तरह से इसे ब्लास्टिंग कंडीशन कहा जाता है। राजीव गांधी सामान्य अस्पताल में कैंसर विशेषज्ञ इन मरीजों को सलाह दे रहे हैं। साथ ही कीमो थेरेपी के साथ मरीज का इलाज किया जा रहा है। जयपुर और बड़े केंद्रों पर भी कुछ पेशेंट के आवेदन आते हैं।
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पहले प्रकाशित : 2 फरवरी, 2024, 19:31 IST
