कृष्ण कुमार गौड़/जोधपुर:- जब कोई व्यक्ति अपने जीवन से निराश हो जाता है या फिर निराश हो जाता है और अपने मन के अंदर की परेशानी को किसी के सामने नहीं ला पाता है, तो ऐसी स्थिति में वह व्यक्ति गलत कदम उठाकर मजबूर हो जाता है। इस स्थिति में उसे यह नहीं बताया गया कि वह जो कदम उठा रहा है, वह कितना खतरनाक है।
हाल ही में जोधपुर के मथानिया क्षेत्र में एक ऐसा मामला भी सामने आया, जिसमें एक ही परिवार के सभी लोगों की मौत हो गई। इसमें सामने आया कि पति-पत्नी अपने दो बच्चों के साथ नहर में कूद गए। इस दौरान महिला और बच्चों की मौत हो गई। वहीं पति नहर से रेलवे ट्रैक पर पहुंच और ट्रेन के आगे ज्ञान जान दे दी। ऐसे में इस मामले से यह भी पता चल सकता है कि पति की मानसिक स्थिति क्या हो सकती है।
मानसिक बीमारी का समय उठाना है ये कदम
जोधपुर के मनोविकार विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. संजय की हिट फ़िल्में, तो उन्हें लगता है कि मानसिक रूप से बीमार होती हैं, तब ऐसे उठाती हैं कदम. मानसिक स्थिति में बहुत सी बातें होती हैं, जिसमें व्यक्ति के साथ-साथ परिवार को भी नुकसान हो सकता है। ऐसे मानसिक शब्दों को पहचानना बहुत जरूरी है और इसमें जागरूकता की काफी जरूरत है। ऐसे लक्षण, तो आने से पहले उनकी सहायता करनी चाहिए।
समय पर लावारिस से इलाज संभव
इस प्रसंग में मुख्यतः यही कारण घटित होता है कि मनुष्य या तो जीवन से निराश होता है, जिसमें आर्थिक तंगी, कर्ज, पत्नी पर शक या उसके किसी ओर से मुख्य कारण होते हैं। यह स्थिति मानसिक रूप से व्यक्तिपरक है। वह व्यक्तिगत जीवन से हार जाती है और इस तरह के कदम उठाती है। ऐसे चोरों का ध्यान रखना चाहिए और परिवार को समय पर उनकी पहचान करानी चाहिए। समय पर शोध प्रबंध को शोध प्रबंध से मनोवैज्ञानिक के माध्यम से सहायता मिल जाती है।
मानसिक रोगियों को ऐसे पहचानें
डॉ. संजय अख्तर ने कहा कि जब भी कोई मानसिक रूप से पीड़ित होता है, तो उसका पहला लक्षण यही होता है कि उसके व्यवहार में बदलाव आ जाता है। वह व्यक्ति अधिकतर अकेला रहता है, समाज से दूरी बना लेता है। ऐसा करने से लगता है कि उस व्यक्ति के जीवन में कुछ बचा ही नहीं है. यह लक्षण एक गलत कदम की ओर ले जाने के लिए होते हैं। वह स्वयं को नुकसान पहुँचाने के लिए शास्त्र के लिए लग जाता है। मित्र और समाज को समझना चाहिए कि उसे कोई समस्या नहीं है।
बॅरेटे परिवार भी कारण
डॉ. संजय अर्थशास्त्री ने कहा कि पहले एक समय था, जब यूनाइटेड फैमिली हुई थी। घर के बड़े-बुज़ुर्ग आसानी से पहचानने लगे थे। यथार्थ का दायित्व माता-पिता का होता है। पहला निजीकरण व्यक्ति का अपने परिवार से होता है। अब अलग से रहने वाले परिवारों के लिए सहायता और साधन उपलब्ध नहीं हैं। किसी भी व्यक्ति को मानसिक समस्या है, तो वह इन सुविधाओं में शामिल हो सकता है, जहां आधारभूत केंद्र चल रहा है। साथ ही टेलीमानस हमारा यहां चल रहा है।
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इस नंबर पर पा सकते हैं समाधान
ऐसे लोग शर्माते हैं और किसी को बताना नहीं चाहते। उनके लिए टेली मैन्स सेल संचालित किया जा रहा है। उस व्यक्ति की निजता बिल्कुल भी भंग नहीं होती है। टोल फ्री नंबर 14416,1800-8914416 पर बात कर आप सहायता ले सकते हैं। काउंसलर को लगता है कि उनके निधान मनोवैज्ञानिक को रिस्पांस करने से ही होगा, तो जरूरत के हिसाब से प्रमाण, साइको थायरेपी और मनोवैज्ञानिक की गाइडेंस से वह व्यक्ति ठीक हो सकता है।
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पहले प्रकाशित : 3 मार्च 2024, 16:59 IST
