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सुआ नाच में छत्तीसगढ़ की संस्कृति की झलक,नृत्य करने घर-घर पहुंच रही महिलाएं, जानें महत्वपूर्ण


अनूप/कोरबाः भारत देश को सामुद्रिक देश माना जाता है, जहां अनेकों परंपराएं आज भी प्रतिरूप हैं और कुछ खत्म हो रही हैं। अपने-अपने क्षेत्र में इन साख का एक अलग ही महत्व होता है। ऐसी एक छत्तीसगढ़ की परंपरा है सुआ नित्य,सुआ का मतलब तोता है. इस नृत्य को लेकर अलग-अलग साध्य भी हैं, आज हम इस नृत्य के बारे में जानते हैं।

छत्तीसगढ़ में परंपरागत रूप से कई सारे लोक नृत्य आज भी प्रचलित हैं, जिनमें से एक सुआ नृत्य है। इस नृत्य में महिलाएं और युवतियां एक बांस के बने खिलौने की टोली में धान रख कर मिट्टी का बना तोता लिखती हैं। इस बांस की गुड़िया को लेकर युवतियां और महिलाएं टोलियां घूम-घूम कर सुआ नृत्य करती हैं। इस नीति को करने के लिए महिलाओं द्वारा स्वयं ही ताली बजाकर सुआ गीत गाया जाता है।

सुआ गीत की व्याख्या
सुआ गीत का तात्पर्य यह है कि सुआ गीत नृत्य करने वाली महिलाएं जब गांव में किसानों के घर-घर जाती थीं। तब उन्हें वह नृत्य के उपहार स्वरूप पैसे या अनाज दिया जाता है। इसका उपयोग गौरा-गौरी के विवाह उत्सव में किया जाता है। इस नृत्य का दूसरा अर्थ यह है कि सुआ नृत्य की शुरुआत दीपावली के दिन से की जाती है, और ऐसी मान्यता है कि पूर्व में दीपावली तक किसानों के उपदेशों में धान की फसल काट ली जाती थी। इसी तरह की खुशियों में घर-घर के उद्यमियों की युक्तियां यह नृत्य क्या करती थीं और उपहार स्वरूप उन्हें नया अनाज दिया जाता था।

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पहले प्रकाशित : 14 नवंबर, 2023, 07:11 IST



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