छत्रपति संभाजीनगर: महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल ने शुक्रवार को कहा कि मराठों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में आरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने श्रमिक कार्यकर्ता मनोज ज़रांगे के बयान को लेकर कुपोषण भी जारी रखा। संप्रदाय की एक रैली में राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता भुजबल ने पूछा कि अचानक मराठों को कुनबी जाति से संबंधित कई रिकॉर्ड कैसे मिल जा रहे हैं।
भुजबल और कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार, डेमोक्रेट, भाजपा के नेता परिषद के सदस्य गोपीचंद पडलकर, प्रकाश शेंडगे और महादेव सहित कई अन्य प्रमुख सोलोमन नेता महाराष्ट्र के जालना जिले के राजेश अंबाद में ‘ओबीसी भटके विमुक्त जात शून्य बचाओ यलगार सभा’ (ओबीसी और खानाबदोश) (रेलवे) में शामिल हुए।
यह कार्यक्रम अंतरवाली सरती गांव से 25 किमी दूर हुआ, जहां जरांगे ने नागालैंड की मांग के लिए पहले अगस्त में और फिर अक्टूबर में भूख हड़ताल की शुरुआत की थी। भुजबल ने कहा, “ओबीसी को संवैधानिक रूप से और सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद नवीनीकृत मिला।” वह (जरांगे) कहते हैं कि हमने उनका (मराठा समुदाय का) 70 साल से नया खाना बनाया है। क्या हम जरांगे के परिवार का कुछ छीन रहे हैं?”
उन्होंने कहा, ‘हमें राष्ट्रीय राजधानी का विरोध नहीं करना चाहिए, लेकिन सोमनाथ कोटे पर कोई व्यवस्था नहीं होनी चाहिए।’ भुजबल ने यह भी सवाल किया कि क्षत्रिय परिवार को एकमुश्त समुदाय कुनबी जाति से संबंधित अभिलेख वाले अचानक सामने आ रहे हैं। जरांगे की हड़ताल के बाद, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली पार्टी को एकमुश्त कोटा का लाभ देने की पेशकश की, उन मराठों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र पत्र जारी करने का निर्णय लिया, जो सिकंदराबाद में निज़ाम शासन के दौरान अपने जिले के कुनबी समुदाय से संबंधित होने वाले थे। के दस्तावेज़ दिखा सकते हैं।
भुजबल ने कहा, ‘शुरुआत में (1948 से पहले) निज़ाम के रेजिडेंट राज्य के हिस्से में रहे मराठवा में 5,000 रिकॉर्ड मिले थे। बाद में यह संख्या 13,500 तक पहुंच गई…जब तेलंगाना में चुनाव हुए, तो यह संख्या और बढ़ गई।’
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पहले प्रकाशित : 17 नवंबर, 2023, 19:17 IST
