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अडानी ग्रुप पर हिंडनबर्ग रिपोर्ट को ‘सच’ कैसे मानें? सीजेआई चंद्रचूड़ ने प्रशांत भूषण से पूछा, क्या उनका कोई सुसमाचार है…


नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जॉर्ज सोरोस फाइनेंस द्वारा क्लोज्ड ग्रुप के खिलाफ रिपोर्ट किए गए संबंधित मामलों की सुनवाई की, जिसमें एडानी ग्रुप को शामिल किया गया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने टेलीकॉम के वकील प्रशांत भूषण से कहा, ”हमें विदेशी रिपोर्ट्स को सच क्यों मानना ​​चाहिए?” हम रिपोर्ट को खारिज नहीं कर रहे हैं, लेकिन हमें साक्ष्य देना चाहिए। तो आपके पास अडानी ग्रुप के खिलाफ क्या सबूत है?”

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा, “किसी भी प्रकाशन की बात बिल्कुल सच नहीं मानी जा सकती।” कोर्ट सुप्रीम ने वकील प्रशांत भूषण से पूछा कि शीर्ष अदालत अडानी समूह की कंपनी हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को “विश्वसनीय” कैसे मान सकती है। सीजेआई डी.वाई. चंद्रचूड़ ने कहा कि शीर्ष अदालत को “हमारी जांच बाइबिल” पर भरोसा है क्योंकि भूषण नेबी द्वारा की गई जांच की विचारधारा पर सवाल उठाए गए हैं।

उन्होंने कहा, ”हमारे पास सेबी की जांच पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है। सेबी एक वैधानिक संस्था है जिसने शेयर बाजार के उल्लंघनों की जांच का काम किया है। सुप्रीम कोर्ट के लिए यह है – बिना किसी सामग्री के – हमारी खुद की एक खोज का पुनर्स्थापना।” पृथिवी में अर्थशास्त्री जे.बी. पारडीवाला और राक्षस मनोज मिश्रा भी शामिल थे।

कंपनी की अदालत की ओर से पेश किए गए बज्र ने अडानी-हिंडनबर्ग विवाद की जांच के लिए किसी अन्य कंपनी या विशेषज्ञ के समूह के गठन का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि सेबी द्वारा तैयार जांच रिपोर्ट का खुलासा नहीं किया गया है।

इस पर सीजेई चंद्रचूड़ ने कहा, “मिस्टर बीरबॉन, उन्होंने (सेबी) जांच पूरी कर ली है। वे कह रहे हैं कि अब ये उनकी ऐतिहासिक शक्ति में है। क्या सेबी को नोटिस जारी करने से पहले जांच का खुलासा करना चाहिए? उन्होंने कहा कि जांच के तहत बिना किसी सेबी के अपराध का आरोप नहीं लगाया जा सकता है।

समीक्षा के दौरान सेबी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मार्केट वैल्यूएशन समय सीमा विस्तार की मांग नहीं की जा रही है और 24 से 22 जांच को पहले ही अंतिम रूप दिया जा चुका है। शेष दो मामलों के संबंध में उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में प्राकृतिक प्रकृति की है और सेबी ने विदेशी धर्म से जुड़ी जानकारी को प्रतिबंधित कर दिया है और उसकी “समय सीमा पर कोई नियंत्रण” नहीं है।

दर्शकों के दौरान शीर्ष अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र सरकार और सेबी को भविष्य में विद्यार्थियों के नुकसान पर रोक लगाने के लिए कदम उठाना चाहिए। उन्होंने कहा, “मुख्य आरोप में से एक कारण हमें हस्तक्षेप करना पड़ा – वह बाजार की भारी क्षमता साझा करता है जिससे इकाइयों को नुकसान हुआ।”

(इनपुट आईएएनएस से भी)

टैग: अदानी ग्रुप, हिंडनबर्ग रिपोर्ट, सुप्रीम कोर्ट



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