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छत्तीसगढ़ः किसान भाई हो सावधान! पराली को लेकर सशक्त कदम उठाने जा रही है सरकार


योगेश कुमार यादव

बलौदा बाजार। पराली के रहने वाले लगातार देशों के अलग-अलग राज्यों में प्रदूषण के मामले में जनसंख्या देखने को मिलती है। पंजाब, हरियाणा और दिल्ली सहित कई जगहों पर प्रदूषण के स्तर पर प्रदूषण फैलाया गया है। वहीं अब छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले में भी पराली का मामला सामने आया है, जिसके बाद प्रसाशन लेकर इस पर सख्ती की गई है। जिले में इस वर्ष 1,96,690 हेक्टेयर धान की फसल उगाई गई, कटाई का कार्य जारी है। वर्तमान में किसानों द्वारा हार्वेस्टर के माध्यम से धान की कटाई का वोग बढ़ाया गया है। कटाई के बाद शेष फसल की तैयारी के लिए खेत में रखे गए पैरा (पराली) के लिए इसे जला दिया जाता है, जो नहीं किया जाता है। वर्तमान समय में यह पर्यावरण और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से बड़ी समस्या बनी हुई है। पराली के पुनर्प्रकाशन के बाद पर्यावरण में कई प्रकार की आकृतियाँ उत्पन्न होती हैं। इससे पहले धुएं में मौजूद गैसों से न केवल मानव स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। बल्कि वायु प्रदूषण का स्तर बहुत ऊंचा है।

पराली के उद्घाटन से तापमान वृद्धि के साथ ही संधि की संरचना का प्रदर्शन होता है और प्रतिभाओं की संख्या कम हो जाती है। जीवांश पदार्थ की मात्रा कम हो जाती है। केचुए, मक़बरे जैसे मित्र पैकेज़ की संख्या कम हो जाने से विक्रय स्टॉक का प्राकृतिक नियंत्रण नहीं हो पाता है। इसके मजबूरन कंपनी और रसायन शास्त्र का उपयोग करना आवश्यक हो जाता है। केवल एक टन के टुकड़ों में 5.5 किलों के टुकड़े, 2.3 किलों के टुकड़े, 2.5 किलों के टुकड़े और 1.2 किलों जैसे मिट्टी के पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। कचरा समझे जाने वाली समुद्रतटों के आदिवासियों को खेत में सोना समझकर मिला दिया गया, जिससे पर्यावरण को भी नुकसान न हो।

फसल कटाई के बाद खेत में रोपे गए फसल अविच्छिन्न के साथ ही जुताई कर शुरूआत पानी का करना चाहिए। इसके बाद ट्राइकोडर्मा का आविष्कार करने से 15 से 20 दिनों के बाद कम्पोस्ट में बदलाव किया गया, जिससे अगली फसल के लिए मुख्य एवं सूक्ष्म तत्व प्राप्त होगा। सफल अविशिष्ट को कम्पोस्ट में परिवर्तित किया जा सकता है जिससे कि गति बढ़ाने के लिए सिचाई के बाद क्रेडिट कार्ड का भी उपयोग किया जा सके। रसायनिक पदार्थों की उपयोगिता क्षमता में वृद्धि होती है, जिससे रसायनिक पदार्थों की जलधारण क्षमता और सूक्ष्म सूक्ष्म सूक्ष्म जीवों की मात्रा में वृद्धि होती है। ऐसा करने से कम केमिकल बेंचमार्क अधिक निर्माण ली जा सकती है। खेत में बचे हुए कृषि अवशेषों को इकट्ठा कर के टुकड़ों में काट लें और ट्राइकोडर्मा या अन्य अपघटक केमपोस्ट तैयार कर लें।

फसल कटाई के बाद कृषि असंस्कृत खेत में ही पड़े रहना और बिना जलाये भी उपयुक्त कृषि यंत्र द्वारा बोनी की जा सकती है। बचे हुए अविभाज्य कंपनी संरक्षण, प्लास्टर नियंत्रण एवं बीज के सही मूल्यांकन के लिए मल्चिंग (पलवार) के रूप में कार्य करेंगे। फ़सल अविशिष्ट का उपयोग मशरूम उत्पादन के लिए किया जा सकता है। धान के पैरा कोलैटिन से उपचार कर स्मार्च के सुपाच्य एवं सुपरमार्केट का उपयोग किया जा सकता है। कार्ड बोर्ड और खुरदुरे कागज निर्माण जैसे अन्य कार्यों में कच्चे माल का उपयोग किया जा सकता है। कृषि मशीनरी का भी प्रयोग किया जा सकता है। फसल कटाई के बाद खेत पर फ़ासल फ़्रैंचाइज़ी के अवशेष के बाद भी बिना जलाए बीजाणु की हड्डी के लिए जीरो सीड कम फ़र्टिलाइज़र ड्रिल हैप्पी सीडर का प्रयोग किया जा सकता है। कम्बेन हार्वेस्टर से कटिंग के बाद सुपर सीडर, स्ट्रा रीपर/स्ट्राम बेलर मल्चर का उपयोग कर फ़सल अविशिष्ट का प्रबंधन किया जा सकता है।

कृषि विभाग वेस्ट डिकम्पोजर का वितरण कर रहा है
कृषि विभाग द्वारा सभी विकासखण्डों में वेस्ट डिकम्पोजर का वितरण किया जा रहा है, जो कि फारल स्ट्राॅल का शीघ्र अपघटन कर कम्पोस्ट तैयार करने में अत्यंत उपयोगी उत्पाद है। वेस्ट डिकम्पोजर की एक बोतल से 30 से 40 दिन में 1 लाख रासायनिक टन जैव अपशिष्ट तैयार किया जा सकता है। इसके लिए 200 लीटर पानी में 2 किलो गुड डाल कर एक बोतल वेस्ट डिकम्पोजर से मिला दे और इसे पूरा कर एक हफ्ते के लिए छोड़ दे। एक सप्ताह के बाद यह नासा उपयोग के लिए तैयार हो जाता है। नासा को फ़ासल फ़्लोरिडा में स्प्रेकर 30 से 40 मिनट में कम्पोस्ट तैयार किया जा सकता है। कृषि विभाग के मैदानी अमलों से संपर्क करके किसान वेस्ट डिकम्पोजर प्राप्त कर सकते हैं।

फ़सल अविभाज्य लेखन पर पैनापन
फ़ारल स्ट्रक्चर से संबंधित कृत यदि शासन के स्मारक में मौजूद है तो उस स्थिति में अर्थदण्ड का प्रस्ताव किया गया है। अर्थदंड के मूल्य 2 भिक्षुओं तक के भू-स्वामी को 2500 रुपये, 2 से 5 भिक्षुओं को 5000 रुपये और 5 भिक्षुओं से अधिक के भू-स्वामी को 15,000 रुपये मूल्य के अर्थदंड का मूल्य बताया गया है। फ़ारल फ़्राम को जलाना में वर्तमान में देश-संबंध समस्या बनी हुई है और प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण भी है। इसका नियंत्रण देश के प्रत्येक किसान और नागरिक को साझा करना चाहिए। भविष्य में आने वाली परेशानियों को देखते हुए, फ़सल फ़्लोरिडा को ठीक करना, जो वर्तमान समय की मांग है। इसके साथ ही किसान अपने-अपने गांव के गौठान में पैरा का दान कर सकते हैं।

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