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‘दुनिया यूरोप की जागीर नहीं’ विदेश मंत्री जयशंकर का बयान, दोस्त रूस ने किया समर्थन


रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर।- इंडिया टीवी हिंदी

छवि स्रोत: फ़ाइल
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर।

जयशंकर पर रूस: रूस ने भारत के विदेश मंत्री के बयान पर सुर में कहा है। रूस भारत का पारंपरिक मित्र है। कट्टर वैश्विक नामांकन में भी रूस और भारत की मित्रता प्रगाढ़ है। भले ही रूस और जापान में अमेरिका, रूस के दुश्मन बन गए हों, या चीन और उत्तर कोरिया, रूस को समर्थन रूप से समर्थन कर रहे हों या फिर इजराइल हमास जंग हो। ऐसे में भारत और रूस की दोस्ती पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। यह बात उदाहरण के तौर पर रूसी विदेश मंत्री के ताजा बयान को देखने को मिल रही है। उन्होंने भारतीय समकक्ष एस. जयशंकर के उस कथन का समर्थन किया गया है, जिसमें जयशंकर ने भारत के पक्ष में वैश्विक अर्थव्यवस्था स्थापित की थी। जयशंकर ने परोक्ष रूप से कहा था कि दुनिया यूरोप की जागीर नहीं है।

साउथ ग्लोबल और ग्लोबल ईस्ट के देश बन रहे नए ‘खिलाड़ी’

रूसी विदेश मंत्री सर्गी लावेरोव ने कहा कि ‘दुनिया यूरोप में ही नहीं बल्कि कहीं और ज्यादा है।’ लावरोव ने कहा कि ग्लोबल मंच पर ग्लोबल साउथ और ग्लोबल ईस्ट का दबदबा हो रहा है। मॉस्को में स्थित प्राइमाकोव कैथेड्रल इंटरनेशनल फ़ोरिम में सोमवार को रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि ‘आज दुनिया में बदलाव हो रहा है। पहले कुछ देशों में ही वैश्विक घटक थे और वो विशेष रूप से पश्चिमी देश थे, इसका कारण भी था।’ लावरोव ने कहा कि ‘आज ग्लोबल मंच पर नए खिलाड़ी उभर रहे हैं और इनमें ग्लोबल साउथ और ग्लोबल ईस्ट प्रमुख हैं। ‘दूसरी संख्या भी हल्दी जा रही है।’

पश्चिमी देश फ्रैंक यूक्रेन का समर्थन करते हैं

रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि ‘यह सही मायने में वैश्विक बहुमत है।’ अब देश अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है ना कि किसी अन्य देश के हितों को।’ रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते रूस ने पश्चिमी देशों पर प्रतिबंध लगाए हैं। वहीं पश्चिमी देश फ्रैंक यूक्रेन का समर्थन कर रहे हैं। यह भी कारण है कि रूसी विदेश मंत्री पश्चिमी देशों में हिस्सेदारी रखते हैं।

जयशंकर ने क्या कहा?

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि यूरोप के लिए बाहर से यात्रा करना जरूरी है। उनका मानना ​​है कि इसमें यूरोप की समस्याएँ हैं और दुनिया की जो समस्याएँ हैं, उनमें यूरोप की समस्याएँ नहीं हैं। असली रूस से तेल की खेप के भारत के फैसले का बचाव करते हुए जयशंकर ने ये बात कही थी। बातचीत के दौरान लावरोव ने एस जयशंकर के इस बयान का ज़िक्र भी किया।

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