रामकुमार नायक/रायपुर : सनातन धर्म में ग्रहण को अत्यंत अशुभ माना गया है। इस बार 28 अक्टूबर 2023 को शरद पूर्णिमा पर फिर से चंद्र ग्रहण लगना वाला है। इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहण होगा। जो खंडग्रास रूप में भारत में भी दिखाई देता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जहां होता है चंद्र ग्रहण दर्शन. वहां सूतक काल भी मान्य है।
सूतक काल से ग्रहण समाप्त होने तक सभी धार्मिक कार्य, सामाजिक कार्य करना मनाही है. चंद्रग्रहण के दौरान लोगों को नियमों का पालन करना चाहिए, क्योंकि इससे जीवन में बुरा प्रभाव पड़ सकता है। राजधानी रायपुर के ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज शुक्ला ने चंद्रग्रह के दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, इसकी जानकारी दी है।
चंद्रग्रह के दौरान करें पूजा-पाठ
ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज शुक्ला ने बताया कि ग्रहण काल के दौरान यथाशक्ति जप करना चाहिए। सामान्य दिनों और समय की अवधि में ग्रहण काल में एक हजार गुना अधिक फल होता है। यदि हम सामान्य समय में एक हज़ार मंगल का जप करेंगे और ग्रहण काल में एक मंगल का जप करेंगे। उनके फल दोनों समान होते हैं। इसलिए ग्रहण काल का बहुत महत्व होता है।
ग्रहण काल में क्या रखें सावधानी
ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज शुक्ला ने बताया कि सूतक काल और ग्रहण काल के दौरान कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। सूतक काल और ग्रहण काल के दौरान स्थापित विग्रह का स्पर्श नहीं करना चाहिए। घर में रखी देवी देवताओं का स्पर्श नहीं करना चाहिए। सूतक काल और ग्रहण काल में माला का स्पर्श नहीं करना चाहिए। केवल मानसिक जप करना जीवन में बहुत अच्छा प्रभाव डालता है।
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पहले प्रकाशित : 27 अक्टूबर, 2023, 21:26 IST
