विशाल भटनागर/मेरठ: खान-पान और कोरोना संक्रमण के दौर में जिस तरह से देखा गया हर व्यक्ति ने कोरोना से बचने के लिए अलग-अलग तरह के मसालों का सेवन किया था। उनका असर कहीं ना कहीं अब मानव जीवन पर देखने को मिल रहा है। फार्मास्युटिकल मेडिकल कॉलेज के हड्डी विभाग की जाए तो वहां बड़ी संख्या में बात हो रही है ऐसे में युवा अब अपने बजट के लिए पहुंच रहे हैं, जहां तक बात है तो यहां अधिक समस्या देखने को मिल रही है। कई युवाओं के कुल्हे का ऑपरेशन तक किया जा रहा है.
स्थानीय 18 से खास बातचीत करते हुए कम्युनिटी मेडिकल कॉलेज के हड्डी विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर ज्ञानेश्वर टॉक ने बताया कि पिछले 3 साल से अगर बात करें तो 18 से लेकर 30 साल तक के युवाओं में इसी तरह की समस्या देखने को मिल रही है। जबकि पहले 60 साल से अधिक के बुजुर्गों को ही इस प्रकार की समस्या होती थी।
सावधानी में उपयोग किया जाने वाला अविश्वास
उनका कहना है कि जिस प्रकार के कोरोना के दौरान किशोरों द्वारा अधिक प्रकार के गुणों का उपयोग किया गया था। इसमें से काफी ऐसी ही जड़ी-बूटी थी, जो कहीं ना कहीं कम भी हो जाती है। ऐसे में नारियल का सेवन करते समय सावधानी बरतनी चाहिए।
ख़ून सुख जाने से होती है समस्या
प्रत्येक व्यक्ति के खोखले में गोल आकार की गेंदें होती हैं, जिससे लोगों को दैनिक रूप से उभरने में सहायता मिलती है। लेकिन, जब इस बॉल में धीरे-धीरे खून की कमी होने लगती है तो ये सुख हो जाता है।
ऑपरेशन ही बचता है लास्ट रैंकिंग
कुल्हे में खून की कमी होने से दर्द की समस्या होती है। इसके बाद धीरे-धीरे-धीरे-धीरे खून सूख जाता है, फिर से ऑपरेशन ही आखिरी बार जारी होता है। जिसके बाद बाजार में विभिन्न स्टील के बॉल को ऑपरेशन के जरिए इस्तेमाल किया जा रहा है। हालाँकि, इससे राहत तो मिल जाती है। लेकिन, पहले जैसी बात नहीं रहती.
शुरुआती दौर में ही सही इलाज
अगर आपको भी रीस्टार्ट-बैठने में दर्द की समस्या हो रही है तो बिल्कुल भी चुनौती ना करें और बल्कि टिप्स लें। शुरूआती दौर में यदि आप इसका छोटा हिस्सा बनाते हैं तो कम खर्च में आपका कुल्हा बनाया जा सकता है। लेकिन, अगर आप इसमें पीसने वाले पेस्टल पेस्ट को ही छोड़ देंगे तो भविष्य में बाजार के उपकरणों का ही एक विकल्प बचेगा।
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पहले प्रकाशित : 31 अक्टूबर, 2023, 12:31 IST
