अनूप/कोरबाः मड़वारानी मंदिर में पंचमी से प्रारंभ हुआ राष्ट्रीय पर्व। मदावारानी मंदिर में मनायी जाती है धूम। वर्ष प्रति यहां त्रयोदशी को रात्रि की पूर्णाहुति होती है। यहाँ 28 अक्टूबर में विजयादशमी का पर्व मनाया जायेगा। छत्तीसगढ़ में मां मड़वारानी को लेकर भक्तों में बहुत ही श्रद्धा भक्ति दर्शन हैं। विशेष रूप से निःसंतान दंपत्ति माता से भगवान की कृपा का आशीर्वाद लेने आते हैं।
मड़वारानी मंदिर में पंचमी तिथि से पूजा प्रारंभ होने के पीछे जनश्रुति है, कि यहां कलमी वृक्ष के मंदिर देवी के स्थान पर आप ही जवारा उग आए थे। स्थानीय शिष्यों का मानना है कि पूजा अनुष्ठान का क्रम लाभ धार्मिक स्थल सौ वर्ष से जारी है। जवारा कलश के साथ मन दीप प्रज्वलित करने से साधक की हर मन देवी पूर्ण होती है। खैर नवरात्र में यहां पंचमी से पूजा होती है लेकिन चैत्र नवरात्र के दौरान पहले दिन से ही पूजा की जाती है।
महाअष्टमी एक विशेष पूजा है
महाअष्टमी पर देवी माता के मस्तक पर हल्दी का तिलक लगाकर पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि देवी को ‘हल्दी के तिलक से सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। अष्टमी पर्व पर देवी की अष्टम स्वरूप महागौरी की पूजा की जाती है. ज्योति कलश व जवारा ज्योति का दर्शन करते हुए नासिक में भक्तजन मंदिर पहुंच रहे हैं।
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पहले प्रकाशित : 26 अक्टूबर, 2023, 16:53 IST
