
रीस्टार्ट और रीबूट दोनों काटेक में अलग-अलग काम होता है।
पुनरारंभ और रिबूट के बीच क्या अंतर है: आजतक हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। डेली रूटीन के कई सारे काम आजतक पर डिपेंड हो गए हैं। ब्लॉग के बाद सेटेक्थ का इस्तेमाल कई गुना बढ़ गया है। छोटे से छोटे फीचर्स के बारे में तो बहुत से लोग जानते हैं लेकिन कई ऐसे भी लोग हैं जिनके फीचर्स के बारे में भी नहीं जानते।
जब भी टेक्नोलॉजी हैंग करती है तो ज्यादातर बार आप लोगों ने यही कहा होगा कि एक बार रिस्टार्ट कर लो, या फिर रिबूट कर लो। अधिकांश टेक्नोलॉजी पैसेंजर रिस्टार्ट और रिबूट एक ही तत्व हैं लेकिन ऐसा नहीं है। लोग इनका प्रयोग तो करते हैं लेकिन इनमें से किसी का भी कोई मतलब नहीं है। क्या आप पुनरारंभ करना चाहते हैं और रीबूट करने में क्या अंतर है। अगर आप भी नहीं जानते तो नहीं हम आपको आज इसकी जानकारी देने वाले हैं।
क्या होता है फ़ोन को रीबूट करना
किसी भी आर्टवर्क को रीबूट करने से उनके कथन नॉन फैंटेसी स्टेट से फैंटेसी स्टेट में एक्टिव हो जाते हैं। रिबूट्स उस कंडीशन में ज्यादातर किया गया है जबटेक काम न कर रहा हो या फिर कोई ऐप रिस्पॉन्स न कर रही हो। रीबूट करने सेटेक अपने पुराने कंडीशन में पहुंच जाता है और उसके सभी फीचर्स पहले की तरह काम करने लगते हैं।
टेक्नोलॉजी को दोबारा शुरू करने का मतलब
स्मार्टफोन को दोबारा चालू करने का मतलब उसे स्विच ऑफ करके चालू करना है। किसी भी सॉफ़्टवेयर को पुनः आरंभ करने के लिए किसी भी सॉफ़्टवेयर को अपडेट या इंस्टॉल किया जाना चाहिए। आपको बता दें कि कंपनी को रीबूट करने के लिए कंपनी के पास सबसे तेज़ प्रॉसेस है। रीबूट्स में टेक्नोलॉजी के सॉफ्टवेअर पर काम किया जाता है, जबकि दूसरी तरफ रीबूट सेटिंग में टेक्नोलॉजी के स्थान पर काम होता है।
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