राहुल मनोहर/सीकर. सिलिकोसिस के रोगियों के लिए राहत की खबर है। अब संदिग्ध सिलिकोसिस अल्ट्रासाउंड की जांच प्रयोगशाला (कृत्रिम तकनीक) तकनीक से हो प्रशिक्षण। इस तकनीक की खासियत यह है कि इसमें न केवल समय कम लगेगा बल्कि इससे न्यूमोकोनोसिस बोर्ड पर दबाब भी कम होगा और प्लांट अधिक रहेगा। इस संबंध में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने अभ्यर्थियों को निर्देश जारी किये हैं।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने राजसिलिकोसिस पोर्टल पर थोक व्यापारी को आवेदन करने के निर्देश दिए हैं। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य सिलिकोसिस थियोटोकोस की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक, सरल, और विश्वसनीय बनाना है, और तकनीक का उपयोग भी सुनिश्चित करना है। इससे सिलिकोसिस से पीड़ित लोगों का सही और शीघ्र इलाज मिल सके।
हॉस्पिटल एप्लीकेशन पर सिलिकोसिस पोर्टल का विकास किया गया है। इस एप्लिकेशन के माध्यम से न्यूमोकोनोसिस पोर्टल पर सिलिकोसिस साक्ष्य-पत्र के लिए रेडियोलॉजिस्ट या मेडिकल स्तर पर और जिला न्यूमोकोनोसिस बोर्ड स्तर पर प्रक्रिया शुरू करने की प्रक्रिया को सहज और अधिक दृश्यमान बनाया जा सकता है।
एक्सरे जांच से ही पता चलता है बीमारी के खतरे का
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अनुसार, स्थापत्य कला एक उपकरण के रूप में कार्य, चेस्ट एक्स-रे की जांच की मदद से मदद मिलेगी। फार्मास्युटिकल टेक्नोलॉजी के एक्स-रे की जांच होने के बाद वह सुझाव देता है कि किस व्यक्ति का एक्स-रे लिया गया है, उसे सिलिकोसिस की संभावना है या नहीं। इस एप्लिकेशन का उपयोग सिलिकोकोसिस जांच में रेडियोलॉजिस्ट की सहायता के लिए किया जा रहा है।
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पहले प्रकाशित : 21 नवंबर, 2023, 06:01 IST
