सौरभ तिवारी/बिलासपुरः- छत्तीसगढ़ प्राकृतिक से प्राकृतिक राज्य है। यहां के नदी, पहाड़ और झरने लोगों को सहज ही आकर्षित करते हैं। सरगुजा से लेकर वन्य जीव तक छत्तीसगढ़ प्राकृतिक प्राकृतिक से भरा हुआ है। छत्तीसगढ़ में आप जैसे ही जाएंगे, आपको प्राकृतिक प्राकृतिक वस्तुएं मिलेंगी। वहीं अब छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक प्रकृति को देखने के लिए विदेशी पर्यटक भी बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं।
जंगल में हर साल हजारों विदेशी सैलानी यहां की प्रकृति, रहन-सहन के साथ ही यहां की संस्कृति को देखने के लिए आते हैं। लेकिन पहली बार फ्रांस से क्षेत्रीय सामाजिक सेवा करने वाले यहां के रहन-सहन से काफी खुश नजर आए और लाल चींटी की चापलूसी भी हो गई। साथ ही नागालैंड के युवाओं के साथ नए अनुभव के लिए। यहां की आवाभगत से दिलचस्प बात उन्होंने माउथलाइफ में आने की बात भी कही।
ऐसे बनाया लेआउट का प्लान
फ्रांस के अविश्वसनीय मर्लिन, उनके पति एरिक, वेरोनिक, क्लाउड पहली बार घूमने आए। ये सभी फ्रांसीसी सैलानी अक्सर पांडिचेरी जाते हैं और अपने अवकाश अवकाश विश्रामते हैं। लेकिन इस बार जब वो गूगल मैप्स से आस-पास के पर्यटन क्षेत्रों की समीक्षा कर रहे थे, तो उन्हें कांगेर वेली की जानकारी मिली, तो उन्होंने यहां आने का भी निश्चय किया। गूगल से इस क्षेत्र की जानकारी एकत्रित करते हुए उन्हें यहां की संस्कृति, बाजार, मडई-मडई के अलावा अतिरिक्त मित्रतावाद से संबंधित जानकारी मिली।
किराने की दुकान में रेस्तरां
सभी फ्रांस के सैलानी जब जंगली क्षेत्र, तो उन्होंने यहां विभिन्न वस्तुओं का सामान उठाया। वन्यजीवों के करपावंड ग्राम का मेला, तीरथगढ़, चित्रकोट, दरभा और नानगुर का बाजार, नृविज्ञान बौद्ध धर्म क्षेत्र। रेस्टुरेंट ट्राइबल होमस्टे में उन्होंने स्थानीय भोजन का आनंद लिया। कांगेर वेली ने गुड़ियापदर और बामनरस में गोंड और धुरवा जनजाति समाज की नैतिकता और नृत्य को देखा और उनके काफी कलाकार की।
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खट्टी चीटी की चटनी
फ़्रांस से आए सैलानियों ने पर्यावरण की लाल चिंटी की चुनौती का भी आनंद लिया। सभी सैलानियों का यह मानना था कि भारत का क्षेत्र ऐसा नितांत क्षेत्र है, जहां न केवल संस्कृति, कला और शानदार जीवन शैली है, बल्कि वनों से यह क्षेत्र सुंदर जल प्रपात, पशु-पक्षियों से घिरा हुआ है। यहां का सार्वभौमिक तंत्र बेहद मजबूत है और इसे बरकरार रखना भी जरूरी है।
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पहले प्रकाशित : 1 फरवरी, 2024, 13:41 IST
