
अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री हेनरी किसिंज़र
अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर का रविवार को 100 वर्ष की आयु में उनके घर पर निधन हो गया। किसिंजर एसोसिएट्स, इंक ने एक बयान में इस बारे में जानकारी दी है। किसिंज़र, एक राजनेता और जाने-माने बंदर थे, राष्ट्रपति रिचर्ड एम. निक्सन और जेराल्ड फोर्ड ने प्रशासन के दौरान अमेरिकी विदेश नीति पर प्रभावशाली काम किया। वे अकेले ऐसे नेता थे जो विदेश मंत्री व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के साथ भी रह रहे थे और दोनों एक साथ पद पर थे। इसी साल 27 मई को उन्होंने अपना 100वां जन्मदिन मनाया था।
यहूदी अप्रवासी थे, जर्मनी से भागकर आये थे अमेरिका
कहा जाता है कि उनकी अमेरिकी विदेश नीति ने किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति पर नियंत्रण कर लिया है। 1938 में जब वह नाज़ी जर्मनी से भागकर एक यहूदी आप्रवासी के रूप में अमेरिका आए तो उन्हें बहुत कम अंग्रेजी बोलनी आती थी, लेकिन उन्होंने हार्वर्ड से स्नातक स्तर की पढ़ाई की। इतिहास में सफल उपलब्धि की और एक लेखक के रूप में अपने कौशल का प्रयोग किया गया। राजनीति में आने से पहले वह हावर्ड में पढ़ते थे। उन्होंने ही वियतनाम युद्ध को ख़त्म करने और अमेरिकी सेना की वापसी में बड़ी भूमिका निभाई थी।
भारत पाक जंग में विवादास्पद रही थी भूमिका
1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उनकी भूमिका काफी विवादास्पद रही थी। इसी युद्ध के कारण विश्व के एक स्वतंत्र देश बांग्लादेश का उदय हुआ। 1971 के युद्ध के वक्ता हेनरी किसिंज़र अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थे। उन्ही की सलाह पर ही अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने भारत को ड्रोन की कोशिश की थी। युद्ध की शुरुआत से पहले जब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी रिचर्ड निक्सन से मुलाकात और यात्रा की जानकारी के लिए अमेरिका पहुंचीं तो उनका इंतजार किया गया। जब उनकी निक्सन से मुलाकात हुई तो उन्होंने काफी बेरुखी के साथ जवाब दिया। इसी के बाद इंदिरा गांधी ने कहा था कि अब जो भी करना है, वो भारत खुद करेगा।
